अंतर्मन

शायरी करना तो शायरों का काम है , हम तो बस यूंही अरमां बयां करते हैं !!

ज़माना मुझसे नाराज़ हो गया है !!!

ज़माना मुझसे नाराज़ हो गया है
अब उसे मेरी हर बात पर
नुक्स नज़र आ रहा है

जब मैंने अपनी ज़िन्दगी की
मुश्किलातों को ख़त्म करने की खातिर
ज़माने के कायदों को तोड़ दिया
ज़माना मुझसे नाराज़ हो गया है ..
पहले जब ज़िन्दगी दुश्वार थी
ज़माना अपनी खुशियों में मशगूल था
मेरे वास्ते सोचने को वक़्त नहीं था
लेकिन आज जब मैंने कोई राह न पाकर अपनी राह बनाई है
तब में पूछता हूँ , क्यूं
ज़माना मुझसे नाराज़ हो गया है !!!!

खुदगर्जी

जीवन  की  मुश्किल  दौड़  में ,
कश्मकश  में ,
कुछ  पाने  की  होड़  में ,
हम  बस  भागते  रहते  हैं ,
रात  भर  जागते  रहते  हैं ,
ख़ुशी  की  तलाश  में ,
ख्वाहिशों  में ,
किसी  के  इंतज़ार  में ,
ना चाहते  हुए  भी ,
हम  बस  बदलते  जाते  हैं ,
खुदगर्ज़  बनते  जाते  हैं  ..
हमारी  दुआओं  में ,
वफाओं  में ,
खुद की सजाओं  में ,
कोई  कमी  न  रह  जाये ,
कि खुदगर्जी  के  आलम  में ,
कोई  न  हमारे  साथ  हो ,
क्यूंकि  मोड़  सभी  को  आते  हैं ,
कुछ  ख़ुशी  से  बदलते  हैं ,
और  कुछ  बदल  दिए  जाते  हैं !!!

- शैल
२५ - मार्च 

न जाने दिल मेरा क्यूँ तुझसे इतना प्यार करता है !!

मेरी  हर  सांस  अब  नाम  तेरा  ही  लेती  है , 
मेरी  हर  धड़कन  में  आवाज़  तेरी  सुने  देती  है , 
निगाहों  में  अब  बस  तेरा  इंतज़ार  रहता  है , 
न  जाने  दिल  मेरा  क्यूँ  तुझसे  इतना  प्यार  करता  है .

मैं  हर  दिन , हर  पल  बस  तुझे  ही  याद  करता  हूँ , 
कहीं  तुझे  सोच  सोच  के  पागल  न  हो  जाऊं
बस अब इसी  बात  से  डरता  है , 
न  जाने  दिल  मेरा  क्यूँ  तुझसे  इतना  प्यार  करता  है .
 
तेरे  चहरे  पे  एक  शिकन  भी  जान  मेरी  ले  लेती  है , 
और  तेरी  कुशी  की  खातिर  अब  ये  कुछ  भी  कर  सकता  है , 
न  जाने  दिल  मेरा  क्यूँ  तुझसे  इतना  प्यार  करता  है .

तुझे  न  देखूं  तू  दिल  मेरा  कुछ  यूँ  बेक़रार  रहता  है , 
बस  हर  पल  मिलाने  की  चाह  में  कुछ  जुगत  लगाता  रहता  है .
न  जाने  दिल  मेरा  क्यूँ  तुझसे  इतना  प्यार  करता  है .

आँखें  मेरी  नम  हो  जाती  है , ज़िन्दगी  जेसे  थम  सी  जाती  है , 
तेरे  मेरे  साथ  न  होने  के  एहसास  से  नवज  जेसे  जम  सी  जाती  है . 
तेरे  बिन  जीने  से  अब  हर  पल  ही  डरता  रहता  है , 
न  जाने  दिल  मेरा  क्यूँ  तुझसे  इतना  प्यार  करता  है .

मैं  जानता  हूँ  तेरा  प्यार  मेरे  लिए  नहीं  है ,
पर  क्या  करूँ  दिल  को  मेरे  इस  सच्चाई  पर  एत्बार   नहीं  है . 
ये  तो  बस  हर  पल  तुझे  पाने  की  दुआ  करता  रहता  है , 
न  जाने  दिल  मेरा  क्यूँ  तुझसे  इतना  प्यार  करता  है .

तेरा  दूर  होने  का  दर  हर  वक़्त  ही  मन  में  रहता  है . 
पागल  सा  हो  जाता  हूँ  और  काबू  खुद  पर  नहीं  रहता  है . 
तुझको  पाने  के  लिए  ये  कुछ  भी  कर  सकता  है , 
न  जाने  दिल  मेरा  क्यूँ  तुझसे  इतना  प्यार  करता  है .

कितना  भी  समझाऊं   दिल  को  अपने  लेकिन , 
तुझे  पाने  की  उम्मीद  वो  हर  वक़्त  ही  करता  है , 
न  जाने  दिल  मेरा  क्यूँ  तुझसे  इतना  प्यार  करता  है .

- शैल
जुलाई २०१०

हमें जिसकी कमी सी है !!


कतरा - कतरा  करके  जोड़ी  हैं , सारी  चीजें  ज़रुरत  की .
फिर  भी  आँखों  में  क्यूं  नमी  सी  है ,
ऐसा  लगता  है , आज  भी  ज़िन्दगी  में ,
हमें  किसी  की  कमी  सी  है  !!

भाग - दौड़  के  इस  दौर में  भी  जब ,
लगे  की  ज़िन्दगी  क्यूं  थमी  सी  है .
भीड़  में  , महफिलों  में  भी , लगता  है  की ,
हमें  किसी  की  कमी  सी  है  !! 

बातों  से  बातें  होती  है , 
इन  बातों  में , यादें  किसी  की  जमी  सी  है 
कितना  भी  खुश  हो  ले  हम , लेकिन 
हमें  किसी  की  कमी  सी  है  !!

क्या  करें,  क्या  न  करें  , यही 
दिल  और  दिमाग  में  ठनी  सी  है .
काश  वो  मुझे  मिल  ही  जाये , 
हमें  जिसकी  कमी  सी  है  !!


- शैल 
मई   - २०१० 

मैं सपने देखता हूँ ..

मैं सपने देखता हूँ ..
मैं सपने देखता हूँ ..

तेरी राह में , तेरे इंतज़ार में ,
तुझसे मिलाने की चाह में ,
बर्फीली रातों में धुप सेकता हूँ ..
मैं सपने देखता हूँ ..

तू दूर है मुझसे, इस बात का कोई गम नहीं है ,
जब तक दूर होकर भी, दिल से तेरे दूर हम नहीं हैं ,
मिट जायेंगे ये फासले, ऐसी उम्मीद सहेजता हूँ ,
मैं सपने देखता हूँ ..

दुनिया जैसे थम सी जाती है , जब याद तेरी मुझे आती है ,
आँखें बंद करुं या खोलूँ ,  नज़र तो अब बस तू ही आती है ,
अब तो तुझको सोचकर , कभी अकेले , मुस्कुराके देखता हूँ ..
मैं सपने देखता हूँ ..

- शैल
मार्च - २०१०



एहसास ..

एक अंजाना सा एहसास,
एक अंजानी सी उलझन.
जो करती है परेशान मुझे,
बेचैन रहता है मेरा मन.  

क्या वास्तव में,
मेरा एहसास , एक एहसास था.
या एक वहम था,
जिस पर मेरा सोचना कुछ खास था .

हज़ारों बार जब इस दिल को,
टटोला मैंने .
बस हमेशा एक अनंत शून्य को,
वहां पाया मैंने.

आज जब मैं हूँ तनहा
और मेरा मन है दुखी.
तब उसी शून्य में मुझे,
एक हलकी परछाई दिखी.

तभी मेरे दिल से,
ये आवाज़ है आयी.
कौन है ये, जिसकी मुझे 
समय पड़ने पर याद है आयी.

दिल ने कहा, यही है वो,
जो है सबकी मंजिल.
क्योंकि आज नहीं तो कल,
उठ जायेगी इस, दुनिया की महफ़िल.

आज मुझे, ये एहसास हुआ,
जैसे मेरी उलझन सुलझ गयी.
मेरे अंजाने से एहसास को,
नयी परिभाषा मिल गयी.

- शैल
नवम्बर - २०००




Waqt

ज़िन्दगी  में  कभी  एईसी  situation  होती  है ,
जब  हमें  motivation की  ज़रुरत  होती  है .
क्या  करें , क्या  न  करें ,
क्या  गलत , क्या  सही , पता  नहीं
आखिर  condition ही  एईसी  होती  है ..
जो  हमने  कभी  न  चाहा  था  करना ,
वही  करने  की  position अपनी  होती  है .
दिल  और  दिमाग  की  fight में
confusion बहुत  ही  होती  है .
एइसे  समय  में , कभी  अकेले  में ,
एक  इंसान  की  हमें  ज़रुरत  होती  है ,
पहचान  मुश्किल  ही  हो  लेकिन ,
नहीं  impossible  होती  है .
सही  वक़्त  पर  किया  काम ,
उम्मीद , बुरे  वक़्त  की  होती  है .
जिसने  समय  पर  जान  लिया , जीत  उसी  की  होती  है ...

- शैल 
२००८